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नालपुर गांव के अनीश कुमार बने असिस्टेंट प्रोफेसर, 26वीं रैंक हासिल कर रचा इतिहास

जनवरी 20, 2026 | By Jhalko Jhunjhunu

राजस्थान के झुंझुनूं जिले की खेतड़ी तहसील के छोटे से गांव नालपुर से आने वाले होनहार युवक अनीश कुमार ने वह कर दिखाया है, जो हजारों युवाओं का सपना होता है। असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा में 26वीं रैंक हासिल कर अनीश कुमार ने न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी यह सफलता मेहनत, लगन और आत्मविश्वास की मिसाल है, जो आज के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

नालपुर गांव के अनीश कुमार बने असिस्टेंट प्रोफेसर
नालपुर गांव के अनीश कुमार बने असिस्टेंट प्रोफेसर

आज जब प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाना आसान नहीं रह गया है, ऐसे समय में ग्रामीण परिवेश से निकलकर इस स्तर की उपलब्धि हासिल करना अपने आप में बड़ी बात है। अनीश कुमार की कहानी यह साबित करती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो संसाधनों की कमी भी रास्ता नहीं रोक सकती।

साधारण परिवार से असाधारण सफलता तक का सफर

अनीश कुमार का जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ। उनके पिता मनीराम खेती-बाड़ी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सीमित आय और संसाधनों के बावजूद मनीराम ने कभी भी बेटे की शिक्षा से समझौता नहीं किया। उन्होंने हर संभव प्रयास किया कि अनीश की पढ़ाई में कोई बाधा न आए।

ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी शिक्षा को लेकर कई चुनौतियां हैं, जैसे बेहतर कोचिंग की कमी, मार्गदर्शन का अभाव और आर्थिक सीमाएं। इन सबके बावजूद अनीश कुमार ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी पढ़ाई को ही सबसे बड़ा हथियार बनाया और निरंतर आगे बढ़ते रहे।

शिक्षा के प्रति बचपन से ही था गहरा लगाव

अनीश कुमार बचपन से ही पढ़ाई में मेहनती और जिज्ञासु रहे हैं। स्कूल के दिनों से ही उन्हें शिक्षण कार्य में रुचि थी। शिक्षक बनकर समाज को दिशा देने का सपना उन्होंने बहुत पहले देख लिया था। यही सपना आगे चलकर असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की प्रेरणा बना।

उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव और आसपास के क्षेत्र से पूरी की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और विषय की गहरी समझ विकसित की। पढ़ाई के दौरान वे केवल परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि विषय को समझने और उस पर पकड़ बनाने पर ज्यादा ध्यान दिया।

असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा की कठिन राह

असिस्टेंट प्रोफेसर की परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। इसमें विषय ज्ञान के साथ-साथ शोध प्रवृत्ति, विश्लेषण क्षमता और निरंतर अध्ययन की जरूरत होती है। हजारों अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन सफलता कुछ ही को मिलती है।

अनीश कुमार ने इस परीक्षा की तैयारी पूरी योजना के साथ की। उन्होंने समय का सही प्रबंधन किया और रोजाना एक निश्चित समय पढ़ाई को दिया। कठिन विषयों को बार-बार दोहराया और अपनी कमजोरियों पर विशेष ध्यान दिया।

तैयारी के दौरान अपनाए गए महत्वपूर्ण बिंदु

  • रोजाना नियमित अध्ययन और रिवीजन
  • विषय की मूल अवधारणाओं पर फोकस
  • पुराने प्रश्नपत्रों का गहन अभ्यास
  • समय प्रबंधन और आत्ममूल्यांकन
  • मानसिक मजबूती और धैर्य बनाए रखना

26वीं रैंक: मेहनत का मिला शानदार परिणाम

कड़ी मेहनत और निरंतर प्रयासों का परिणाम तब सामने आया, जब असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा के नतीजे घोषित हुए। अनीश कुमार ने 26वीं रैंक हासिल कर सभी को चौंका दिया। यह उपलब्धि केवल एक रैंक नहीं, बल्कि वर्षों की तपस्या और संघर्ष का परिणाम है।

उनकी इस सफलता ने यह सिद्ध कर दिया कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले छात्र भी बड़े सपने देख सकते हैं और उन्हें पूरा कर सकते हैं। आज अनीश कुमार उन युवाओं के लिए उदाहरण बन चुके हैं, जो परिस्थितियों से डरकर अपने सपनों को छोड़ देते हैं।

गांव और क्षेत्र में खुशी का माहौल

अनीश कुमार की सफलता की खबर जैसे ही नालपुर गांव और आसपास के क्षेत्र में फैली, खुशी की लहर दौड़ गई। गांव के लोगों ने मिठाइयां बांटी और एक-दूसरे को बधाइयां दीं। हर कोई इस होनहार बेटे की तारीफ करता नजर आया।

ग्रामीणों का कहना है कि अनीश कुमार ने यह साबित कर दिया कि गांव के बच्चे भी किसी से कम नहीं हैं। उनकी सफलता से गांव के अन्य छात्रों को भी पढ़ाई के लिए प्रेरणा मिलेगी और वे भी बड़े लक्ष्य तय करेंगे।

पिता मनीराम का योगदान: एक मजबूत आधार

अनीश कुमार की सफलता के पीछे उनके पिता मनीराम का अहम योगदान रहा है। एक किसान होने के बावजूद उन्होंने बेटे की शिक्षा को सबसे ऊपर रखा। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारी और अनीश का हौसला बढ़ाते रहे।

मनीराम का मानना है कि शिक्षा ही वह साधन है, जो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बदल सकता है। उनका यह विश्वास आज सच साबित हुआ है।

युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने अनीश कुमार

आज अनीश कुमार केवल एक असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। मेहनत, अनुशासन और धैर्य ही असली कुंजी हैं।

जो युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए अनीश कुमार का सफर यह सीख देता है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल जरूर मिलती है।

नालपुर गांव के अनीश कुमार की असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर 26वीं रैंक के साथ हुई नियुक्ति पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। यह सफलता न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन की उपलब्धि है, बल्कि ग्रामीण प्रतिभाओं की क्षमता का प्रमाण भी है। उम्मीद है कि उनकी यह उपलब्धि आने वाले समय में और भी युवाओं को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी

News Source - Anish Kumar Choudhary